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॥ संस्कृतभारतम् ॥

॥ ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

  • आचार्य दण्डी और काव्यादर्श...

    आचार्य दण्डी और काव्यादर्श डा....

    आचार्य दण्डी और काव्यादर्श डा. राकेश कुमार जैन संस्कृत साहित्यशास्त्र के इतिहास में आचार्य दण्डी का विशेष महत्त्व है । [...]

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    आचार्य दण्डी और काव्यादर्श
  • आचार्य भामह एवं उनका...

      आचार्य भामह एवं उनका...

      आचार्य भामह एवं उनका काव्यालङ्कार डा.राकेश कुमार जैन ‘साहित्याचार्य ’ संस्कृत साहित्यशास्त्र प्रणेताओं में आचार्य भामह का स्थान अत्यन्त [...]

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    आचार्य भामह एवं उनका काव्यालङ्कार
  • गंगा-यमुना को मनुष्य मानने...

    हाल ही में नैनीताल हाईकोर्ट...

    हाल ही में नैनीताल हाईकोर्ट ने गंगा नदी को देश की पहली जीवित इकाई के रूप में मान्यता दी है [...]

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  • पुराणानि...

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    पुराणानि
  • अभिज्ञानशाकुन्तलम्...

    || अभिज्ञानशाकुन्तलम् || अभिज्ञान शाकुन्तलम्...

    || अभिज्ञानशाकुन्तलम् || अभिज्ञान शाकुन्तलम् महाकवि कालिदासेन विरचितमेकं बहु प्रसिद्धं नाटकम् अस्ति। अस्य नाटकस्य नायकः दुष्यन्तः नायिका शकुन्तला चास्ति। दुष्यन्तः [...]

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    अभिज्ञानशाकुन्तलम्
  • न्यायसूत्र ...

    ​न्यायसूत्र भारतीय दर्शन का प्राचीन ग्रन्थ है।...

    ​न्यायसूत्र भारतीय दर्शन का प्राचीन ग्रन्थ है। इसके रचयिताअक्षपाद गौतम हैं। यह न्यायदर्शन का सबसे प्राचीन रचना है। न्यायसूत्र के रचनाकाल के विषय में विद्वानों [...]

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    न्यायसूत्र 
  • संस्कृतभारतम्...

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    संस्कृतभारतम्

वैदिक संस्कृति का चीरहरण

वैदिक संस्कृति का चीरहरण              पंण्डित परन्तप प्रेमशंकर (सिद्धपुर) भीष्मपितामह, महाभारत का एक उदार चरित पात्र हैं, तथापि द्रौपदी के चीरहरण पर मौन रहने के कारण, उनकी श्वेत एवं निर्मल प्रतिभा पर एक कलंक भारतीय इतिहास में आज भी अंकीत हैं । आज कई बहुश्रुत वक्ता हमारी सभ्यता एवं सांस्कृति को विकृत एवं कलंकित करने […]

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वैदिक संस्कृति का चीरहरण              पंण्डित परन्तप प्रेमशंकर (सिद्धपुर) भीष्मपितामह, महाभारत का एक उदार चरित पात्र हैं, तथापि द्रौपदी के चीरहरण पर मौन रहने के कारण, उनकी श्वेत एवं निर्मल प्रतिभा पर एक कलंक भारतीय इतिहास में आज भी अंकीत हैं । आज कई बहुश्रुत वक्ता हमारी सभ्यता एवं सांस्कृति को विकृत एवं कलंकित करने […]

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मंत्रो की असर – Effect of Mantras

मंत्रों की असरकारकता क्यों नहीं होती           – पण्डित परन्तप प्रेमशंकर – सिद्धपुर   वैसे तो इस वर्ष में ही मैने एक पुस्तक मंत्रशक्ति एवं उपासना रहस्य प्रकाशित की है, जिसमें मंत्रों की उत्पत्ति, प्रकार, भेद, जाति, उनकी उच्चारण पद्धति, छन्द-विनियोगादि की विस्तृत चर्चा श्रुति-स्मृति, तंत्रागम एवं पुराणो सहित अनेक ग्रंथों के आधार पर की […]

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मंत्रों की असरकारकता क्यों नहीं होती           – पण्डित परन्तप प्रेमशंकर – सिद्धपुर   वैसे तो इस वर्ष में ही मैने एक पुस्तक मंत्रशक्ति एवं उपासना रहस्य प्रकाशित की है, जिसमें मंत्रों की उत्पत्ति, प्रकार, भेद, जाति, उनकी उच्चारण पद्धति, छन्द-विनियोगादि की विस्तृत चर्चा श्रुति-स्मृति, तंत्रागम एवं पुराणो सहित अनेक ग्रंथों के आधार पर की […]

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धर्म एवं ईश्वर का स्वरूप

धर्म एवं ईश्वर का वास्तविक स्वरूप     –    पण्डित परन्तप प्रेमशंकर सिद्धपुर   विश्वमें अनेक संस्कृतियां एवं सभ्यताए प्रवर्तमान है । मानवी अपनी संस्कृति या सभ्यता को ही सर्वश्रेष्ठ स्थापित करनेका प्रयास करता रहता है, और वह सर्वस्विकार्य नहीं होता । परिणामतः वर्गविग्रह, जातिविग्रह, देशविग्रहादि का प्रकोप बढता है ।   हमारी मान्यताए एवं विचारधारा […]

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धर्म एवं ईश्वर का वास्तविक स्वरूप     –    पण्डित परन्तप प्रेमशंकर सिद्धपुर   विश्वमें अनेक संस्कृतियां एवं सभ्यताए प्रवर्तमान है । मानवी अपनी संस्कृति या सभ्यता को ही सर्वश्रेष्ठ स्थापित करनेका प्रयास करता रहता है, और वह सर्वस्विकार्य नहीं होता । परिणामतः वर्गविग्रह, जातिविग्रह, देशविग्रहादि का प्रकोप बढता है ।   हमारी मान्यताए एवं विचारधारा […]

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संस्कृत: कुछ रोचक तथ्य…. (संस्कृत के प्रचार प्रसार हेतु अन्य  समूह  से प्राप्त ) संस्कृत के बारे में ये 20 तथ्य जान कर आपको भारतीय होने पर गर्व होगा।   आज हम आपको संस्कृत के बारे में कुछ  ऐसे तथ्य बता रहे हैं,जो किसी भी भारतीय  का सर गर्व से ऊंचा कर देंगे;;   .1. […]

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  1. राम (अकारान्त पुल्लिंग शब्द) प्रथमा          रामः             रामौ             रामाः द्वितीया       रामम्             रामौ             रामान् तृतीया        रामेण            रामाभ्याम्        रामैः चतुर्थी        रामाय            रामाभ्याम्         रामेभ्यः पंचमी        रामात्            रामाभ्याम्           रामेभ्यः षष्ठी            रामस्य          रामयोः              रामाणाम् सप्तमी           रामे            […]

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आचार्य दण्डी और काव्यादर्श

आचार्य दण्डी और काव्यादर्श डा. राकेश कुमार जैन संस्कृत साहित्यशास्त्र के इतिहास में आचार्य दण्डी का विशेष महत्त्व है । इनका ‘काव्यादर्श’ ग्रन्थ शताब्दियों से साहित्यशास्त्र के आचार्यों के लिए आदर का पात्र बना हुआ है । दण्डी ने न केवल आलङ्कारिक के रूप में बल्कि कवि के रूप में भी अच्छी प्रतिष्ठा प्राप्त की […]

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आचार्य दण्डी और काव्यादर्श डा. राकेश कुमार जैन संस्कृत साहित्यशास्त्र के इतिहास में आचार्य दण्डी का विशेष महत्त्व है । इनका ‘काव्यादर्श’ ग्रन्थ शताब्दियों से साहित्यशास्त्र के आचार्यों के लिए आदर का पात्र बना हुआ है । दण्डी ने न केवल आलङ्कारिक के रूप में बल्कि कवि के रूप में भी अच्छी प्रतिष्ठा प्राप्त की […]

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आचार्य भामह एवं उनका काव्यालङ्कार

  आचार्य भामह एवं उनका काव्यालङ्कार डा.राकेश कुमार जैन ‘साहित्याचार्य ’ संस्कृत साहित्यशास्त्र प्रणेताओं में आचार्य भामह का स्थान अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है । उनके द्वार प्रणीत काव्यालङ्कार साहित्यशास्त्र का प्रथम उपलब्ध ग्रन्थ है । जिसमें साहित्यशास्त्र एक स्वतन्त्र शास्त्र के रूप में दिखाई पडता है । इसके पूर्व भरत मुनि द्वारा विरचित नाट्यशास्त्र के नवमें […]

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  आचार्य भामह एवं उनका काव्यालङ्कार डा.राकेश कुमार जैन ‘साहित्याचार्य ’ संस्कृत साहित्यशास्त्र प्रणेताओं में आचार्य भामह का स्थान अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है । उनके द्वार प्रणीत काव्यालङ्कार साहित्यशास्त्र का प्रथम उपलब्ध ग्रन्थ है । जिसमें साहित्यशास्त्र एक स्वतन्त्र शास्त्र के रूप में दिखाई पडता है । इसके पूर्व भरत मुनि द्वारा विरचित नाट्यशास्त्र के नवमें […]

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हाल ही में नैनीताल हाईकोर्ट ने गंगा नदी को देश की पहली जीवित इकाई के रूप में मान्यता दी है और गंगा-यमुना को जीवित मनुष्य के समान अधिकार देने का फैसला किया है। इस फैसले के बाद भारत की दोनों महत्वपूर्ण नदियों गंगा और यमुना को अब एक मानव की तरह संविधान की ओर से […]

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साहित्यशास्त्र का विकास क्रम डा.राकेश कुमार जैन साहित्यशास्त्र के बीज हमें वैदिक युग से ही प्राप्त हो रहे हैं किन्तु भरत मुनि के नाट्यशास्त्र से पूर्व ऐसा कोई ग्रन्थ उपलब्ध नहीं है जिसको हम विशुद्ध साहित्यशास्त्रीय ग्रन्थ कह सकें । अतः काव्य के शास्त्रीय स्वरूप का निरूपण करने वाला प्राचीनतम ग्रन्थ भरत मुनि कृत ‘नाट्यशास्त्र’ […]

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येषां न विद्या न तपो न दानं ज्ञानं न शीलं न गुणो न धर्मः । ते मर्त्यलोके भुविभारभूता मनुष्यरूपेण मृगाश्चरन्ति ॥ अर्थ- जिन लोगों के पास न तो विद्या है, न तप, न दान, न शील, न गुण और न धर्म. वे लोग इस पृथ्वी पर भार हैं और मनुष्य के रूप में जानवर की […]

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