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संस्कृत: कुछ रोचक तथ्य…. (संस्कृत के प्रचार प्रसार हेतु अन्य  समूह  से प्राप्त ) संस्कृत के बारे में ये 20 तथ्य जान कर आपको भारतीय होने पर गर्व होगा।   आज हम आपको संस्कृत के बारे में कुछ  ऐसे तथ्य बता रहे हैं,जो किसी भी भारतीय  का सर गर्व से ऊंचा कर देंगे;;   .1. […]

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आचार्य दण्डी और काव्यादर्श

आचार्य दण्डी और काव्यादर्श डा. राकेश कुमार जैन संस्कृत साहित्यशास्त्र के इतिहास में आचार्य दण्डी का विशेष महत्त्व है । इनका ‘काव्यादर्श’ ग्रन्थ शताब्दियों से साहित्यशास्त्र के आचार्यों के लिए आदर का पात्र बना हुआ है । दण्डी ने न केवल आलङ्कारिक के रूप में बल्कि कवि के रूप में भी अच्छी प्रतिष्ठा प्राप्त की […]

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आचार्य दण्डी और काव्यादर्श डा. राकेश कुमार जैन संस्कृत साहित्यशास्त्र के इतिहास में आचार्य दण्डी का विशेष महत्त्व है । इनका ‘काव्यादर्श’ ग्रन्थ शताब्दियों से साहित्यशास्त्र के आचार्यों के लिए आदर का पात्र बना हुआ है । दण्डी ने न केवल आलङ्कारिक के रूप में बल्कि कवि के रूप में भी अच्छी प्रतिष्ठा प्राप्त की […]

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आचार्य भामह एवं उनका काव्यालङ्कार

  आचार्य भामह एवं उनका काव्यालङ्कार डा.राकेश कुमार जैन ‘साहित्याचार्य ’ संस्कृत साहित्यशास्त्र प्रणेताओं में आचार्य भामह का स्थान अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है । उनके द्वार प्रणीत काव्यालङ्कार साहित्यशास्त्र का प्रथम उपलब्ध ग्रन्थ है । जिसमें साहित्यशास्त्र एक स्वतन्त्र शास्त्र के रूप में दिखाई पडता है । इसके पूर्व भरत मुनि द्वारा विरचित नाट्यशास्त्र के नवमें […]

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  आचार्य भामह एवं उनका काव्यालङ्कार डा.राकेश कुमार जैन ‘साहित्याचार्य ’ संस्कृत साहित्यशास्त्र प्रणेताओं में आचार्य भामह का स्थान अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है । उनके द्वार प्रणीत काव्यालङ्कार साहित्यशास्त्र का प्रथम उपलब्ध ग्रन्थ है । जिसमें साहित्यशास्त्र एक स्वतन्त्र शास्त्र के रूप में दिखाई पडता है । इसके पूर्व भरत मुनि द्वारा विरचित नाट्यशास्त्र के नवमें […]

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हाल ही में नैनीताल हाईकोर्ट ने गंगा नदी को देश की पहली जीवित इकाई के रूप में मान्यता दी है और गंगा-यमुना को जीवित मनुष्य के समान अधिकार देने का फैसला किया है। इस फैसले के बाद भारत की दोनों महत्वपूर्ण नदियों गंगा और यमुना को अब एक मानव की तरह संविधान की ओर से […]

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साहित्यशास्त्र का विकास क्रम डा.राकेश कुमार जैन साहित्यशास्त्र के बीज हमें वैदिक युग से ही प्राप्त हो रहे हैं किन्तु भरत मुनि के नाट्यशास्त्र से पूर्व ऐसा कोई ग्रन्थ उपलब्ध नहीं है जिसको हम विशुद्ध साहित्यशास्त्रीय ग्रन्थ कह सकें । अतः काव्य के शास्त्रीय स्वरूप का निरूपण करने वाला प्राचीनतम ग्रन्थ भरत मुनि कृत ‘नाट्यशास्त्र’ […]

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​*समाज सेवा है या स्वार्थ ?

आजकल हर कोई समाज सेवक बन कर या नेताजी (लीडर) बन कर अपने आप को समाज सेवक कहलाने का शौक रखता है । ये शौक क्यों पैदा होते है ? इसके पीछे कुछ विशेष कारण होते है । कारण दो प्रकार के -१. निष्कपट भाव से सेवा २. स्वार्थ भाव और लोभ । वैसे सेवक […]

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आजकल हर कोई समाज सेवक बन कर या नेताजी (लीडर) बन कर अपने आप को समाज सेवक कहलाने का शौक रखता है । ये शौक क्यों पैदा होते है ? इसके पीछे कुछ विशेष कारण होते है । कारण दो प्रकार के -१. निष्कपट भाव से सेवा २. स्वार्थ भाव और लोभ । वैसे सेवक […]

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​वेदो में अन्न

​वेदो में अन्न अद् भक्षणार्थक धातु से क्त प्रत्यय करने से अन्न शब्द का साधुत्व सम्पन्न होता है।अन्न और धान्य दो पृथक् पद हैं,दोनो का वर्तमान समय में पर्याय के रूप मे परस्पर प्रयोग होता है,लेकिन दोनो अलग-अलग अर्थ के प्रतिपादक हैं। जैसे- शस्यं क्षेत्रगतं प्राहुः, सतुषं धान्यमुच्यते। आमं वितुषमित्युक्तं, स्विन्नमन्नमुदाहतम्।। निरुक्तकार यास्क ने अन्न […]

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​वेदो में अन्न अद् भक्षणार्थक धातु से क्त प्रत्यय करने से अन्न शब्द का साधुत्व सम्पन्न होता है।अन्न और धान्य दो पृथक् पद हैं,दोनो का वर्तमान समय में पर्याय के रूप मे परस्पर प्रयोग होता है,लेकिन दोनो अलग-अलग अर्थ के प्रतिपादक हैं। जैसे- शस्यं क्षेत्रगतं प्राहुः, सतुषं धान्यमुच्यते। आमं वितुषमित्युक्तं, स्विन्नमन्नमुदाहतम्।। निरुक्तकार यास्क ने अन्न […]

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भारतीय ज्योतिष में काल गणना

ज्योतिष में काल गणना हमारे पूर्वजों से हमें अनेक परम्पराएं एवं सामाजिक व्यवस्थाएं विरासत में मिली हैं उन सब परम्पराओं को सामाजिक व्यवस्थाओं को संस्कृति प्रेमीजन अपने जीवन का अंग बनाये हुए हैं परन्तु कुछ कालान्तर से उन परम्पराओं को, व्यवस्थाओं को आधुनिकता के भिन्न भिन्न विषयों में उलझ कर उन्हें छोड़ दिया है आज […]

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ज्योतिष में काल गणना हमारे पूर्वजों से हमें अनेक परम्पराएं एवं सामाजिक व्यवस्थाएं विरासत में मिली हैं उन सब परम्पराओं को सामाजिक व्यवस्थाओं को संस्कृति प्रेमीजन अपने जीवन का अंग बनाये हुए हैं परन्तु कुछ कालान्तर से उन परम्पराओं को, व्यवस्थाओं को आधुनिकता के भिन्न भिन्न विषयों में उलझ कर उन्हें छोड़ दिया है आज […]

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