Search News Posts

  • General Inquiries :- +91-9799213697

  • Support :- +91-9509559668

Home

सुभाषित

News filed in:

"सुभाषित"

येषां न विद्या न तपो न दानं ज्ञानं न शीलं न गुणो न धर्मः । ते मर्त्यलोके भुविभारभूता मनुष्यरूपेण मृगाश्चरन्ति ॥ अर्थ- जिन लोगों के पास न तो विद्या है, न तप, न दान, न शील, न गुण और न धर्म. वे लोग इस पृथ्वी पर भार हैं और मनुष्य के रूप में जानवर की […]

Read More

​दानेन भूतानि वशी भवन्ति दानेन वैराण्यपि यान्ति नाशम् । परोऽपि बन्धुत्वभुपैति दानैर् दानं हि सर्वेव्यसनानि हन्ति ॥ दान से सभी प्राणी वश होते है; दान से बैर खत्म हो जाता है । दान से शत्रु भी भाई बन जाता है; दान से ही सभी संकट दूर होते हैं ।

Read More

​उद्यमः साहसं धैर्यं बुद्धिः शक्तिः पराक्रमः । षडेते यत्र वर्तन्ते तत्र दैवं सहायकृत् ॥ जहाँ उद्योग, साहस, धैर्य, बुद्धि, शक्ति और पराक्रम ये छे (गुण) होते हैं वहाँ तकदीर मदत करती है ।

Read More

*प्रारभ्यते न खलु विघ्नभयेन नीचै:* *प्रारभ्य विघ्न विहता विरमन्ति मध्या:* *विघ्नै: पुन: पुनरपि प्रतिहन्यमाना* *प्रारभ्य चोत्तम जना: न परित्यजन्ति ।।* *भावार्थ―* नीच मनुष्य विघ्न के भय से कोई काम आरम्भ नहीं करते मध्यम कोटि के मनुष्य कार्य तो आरम्भ कर देते हैं परन्तु मध्य में आये विघ्नों से घबराकर कार्य को छोड़ बैठते हैं। इसके […]

Read More

​स हि भवति दरिद्रो यस्य तॄष्णा विशाला। मनसि च परितुष्टे कोऽर्थवान् को दरिद्रा:॥ The person with vast desires is definitely poor. For the one with satisfied mind, there is no distinction between rich and poor. जिसकी कामनाएँ विशाल हैं, वह ही दरिद्र है। मन से संतुष्ट रहने वाले के लिए कौन धनी है और कौन […]

Read More

धर्मस्य दुर्लभो ज्ञाता सम्यक् वक्ता ततोऽपि च । श्रोता ततोऽपि श्रद्धावान् कर्ता कोऽपि ततः सुधीः ॥ धर्म को जानने वाला दुर्लभ होता है, उसे श्रेष्ठ तरीके से बताने वाला उससे भी दुर्लभ, श्रद्धा से सुनने वाला उससे दुर्लभ, और धर्म का आचरण करने वाला सुबुद्धिमान सबसे दुर्लभ है

Read More

error: Content is protected !!